*मुक्त-मुक्तक : 507 - ऊँट पर भी बैठ जो................


ऊँट पर भी बैठ जो 

बाज़ार जायें हम II

काटने कुत्ते वहाँ भी 

पहुँचें दम के दम II

इस क़दर दुश्मन हमारे 

हो गए यारों ,

तोहफ़े खोलें तो लगता

 है न निकलें बम II

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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