*मुक्त-मुक्तक : 505 - चीज़ों की तरह रखते हैं............


चीज़ों की तरह रखते हैं सब मुझको उठाकर ॥
बिन हाथ-पैर कैसे कहीं जाऊँ मैं आकर ?
इतना ग़रीब इतना-इतना-इतना ग़रीब हूँ ,
देते हैं भिकारी भी भीक मुझको बुलाकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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