*मुक्त-मुक्तक : 503 - उसके पहलू में सुबह..............


उसके पहलू में सुबह 
सोऊँ जाग रात करूँ ॥
इतना पाया न कभी 
वक़्त उससे बात करूँ ॥
सिर्फ़ हसरत ही रही 
उसकी सोहबत की मेरी ,
खाली अरमान रहा 
ससे मुलाक़ात करूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा