*मुक्त-मुक्तक : 501 - फिर वही या दूसरी...........


फिर वही या दूसरी 
तक्लीफ़ मिलती है ,
आज देखें कौन सी 
तक्लीफ़ मिलती है ?
आते तो हैं लुत्फ़ की 
उम्मीद से हम याँ ,
लेकिन अक्सर इक नई 
तक्लीफ़ मिलती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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