*मुक्त-मुक्तक : 498 - हाथियों को बन्दरों..............


हाथियों को बन्दरों 
जैसा उछलने का लगा ॥
सेब खाती हिरनियों को 
गोश्त चखने का लगा ॥
जिसको देखो दायरे से 
अपने बाहर हो रहा ,
बिलबिलाते केंचुओं को 
शौक़ डसने का लगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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