*मुक्त-मुक्तक : 497 - कितनी-कितनी मुश्किलें..........


कितनी-कितनी मुश्किलें , 
किस-किस क़दर दुश्वारियाँ ॥
तय है रोने-धोने की 
आयेंगीं कई-कई बारियाँ ॥
कर रहा सब जान दिल के 
हाथ हो मज्बूर पर ,
चाँद से भोला चकोरा 
इश्क़ की तैयारियाँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । होली की हार्दिक बधाई।
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक