*मुक्त-मुक्तक : 496 - सिदूर माँग का न..............


सिदूर माँग का न पग की 
धूल हम हुए ॥
जूड़े का भी नहीं न रह का 
फूल हम हुए ॥
उसने तो उसको चाहने की 
छूट भी न दी ,
दिल रख के भी यों इश्क़ के 
फिज़ूल हम हुए ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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