*मुक्त-मुक्तक : 492 - बतलाओ न दो-चार नहीं..........


बतलाओ न दो-चार नहीं सैकड़ों दफ़ा ॥
तारी किये हैं तुमने मुझपे ज़ुल्म-ओ-जफ़ा ॥
फिर भी किये ही जाऊँ तुमसे इश्क़-ओ-वफ़ा ॥
होता नहीं हूँ क्यों कभी भी बरहम-ओ-ख़फ़ा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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