*मुक्त-मुक्तक : 489 - इसकी धड़कन अलग है..............



इसकी धड़कन अलग है बेढब है ॥
इसमें पहले भी न थी नै अब है ॥
दिल को मेरे खँगाल लो जितना ,
आर्ज़ू के सिवा यहाँ सब है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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