*मुक्त-मुक्तक : 487 - झुका-झुका सर..................


झुका-झुका सर उठा-उठा कर 
निगाह करते हैं ॥
कभी-कभी कुछ बता-बता कर 
गुनाह करते हैं ॥
न जिसके क़ाबिल,न जिसके लायक 
मगर ख़ुदाई से ,
उसी को पाने की ज़िद उसी की 
वो चाह करते हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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