*मुक्त-मुक्तक : 484 - नहीं कुछ मुफ़्त में.................


नहीं कुछ मुफ़्त में देता वो पूरा दाम लेता है ॥
वगरना उसके एवज में वो दूना काम लेता है ॥
नहीं वो हमसफ़र मेरा न मेरा रहनुमा लेकिन ,
फिसलने जब भी लगता हूँ वो आकर थाम लेता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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