*मुक्त-मुक्तक : 482 - मैं छोटी-छोटी सुइयों..............


मैं छोटी-छोटी सुइयों वो लंबे तीरों का ॥
मैं सौदागर हूँ छुरियों का वो शमशीरों का ॥
मैं सिर पर रख बेचूँ लोहा वो दूकान सजा ,
वो भी मुझसा ही है फ़र्क है बस तक़्दीरों का ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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