*मुक्त-मुक्तक : 480 - सारी दुनिया से अलग..................


सारी दुनिया से अलग भाग-भाग रहता था ॥
याद में उसकी खोया जाग-जाग रहता था ॥
मैं भी हँसता था कभी जब वो मुझपे आशिक़ थे ,
दिल ये मेरा भी सब्ज़ , बाग़बाग़ रहता था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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