*मुक्त-मुक्तक : 477 - देखने में ही नहीं.............


देखने में ही नहीं टूटा हुआ सा मैं ॥
दरहक़ीक़त ही तो हूँ फूटा हुआ सा मैं ॥
’’ सबब तुझको पकड़ने की तमन्ना में ,
दीन , दुनिया , ख़ुद से भी छूटा हुआ सा मैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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