*मुक्त-मुक्तक : 473 - अहसास दे शरबत..................


अहसास दे शरबत जो पुरानी शराब सा ॥
सच सामने हो फिर भी हो महसूस ख़्वाब सा ॥
फ़ौरन निगाह का इलाज कीजिए जनाब ,
अच्छा नहीं चराग़ दिखना आफ़ताब सा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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