*मुक्त-मुक्तक : 474 - दस्ती - रूमाल ठीक................


दस्ती - रूमाल ठीक - ठीक न धोना आया ॥
पतला सा धागा सुई में न पिरोना आया ॥
तुमने उसको पहाड़ टालने का काम दिया ,
जिसको टीला तो क्या ढेला भी न ढोना आया !
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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