*मुक्त-मुक्तक : 468 - पहले भी थे पर इतने...........


पहले भी थे पर इतने नहीं थे तब आदमी ॥
मतलब परस्त जितने हुए हैं अब आदमी ॥
इक दौर था ग़ैरों पे भी जाँ वारते थे लोग ,
न जाने फिर से वैसे ही होंगे कब आदमी ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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