76 : ग़ज़ल - प्यार उनका मेरा................



प्यार उनका मेरा अब है ठहरा हुआ ॥

था जो गंगो-जमन थार सहरा हुआ ॥

इस तरह कुछ हुए हादसे दोस्तों ,

उनकी दीवाली अपना दशहरा हुआ ॥

मुझको सदमा हुआ जब गिरा ,चेहरा

मेरे धूसर पे उनका सुनहरा हुआ ॥

उनके ही साथ सब साज-ओ-सुर उठ गये ,

अब रहेगा यहाँ चुप ही पसरा हुआ ॥

मुझसे हरगिज़ नहीं प्यार करते हैं वो ,

यूँ वो चीखे कि मैं सुन के बहरा हुआ ॥

कब तलक उनको आख़िर मनाते रहें ?

उनका महँगा हर इक नाज़-ओ-नख़रा हुआ ॥

अपनी हर बात पहले बताते थे वो ,

अब तो पेट उनका खाई से गहरा हुआ ॥

अब वो डरते हैं दीपावली में बहुत ,

उनका बच्चा धमाकों से बहरा हुआ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (07-01-2014) को पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार; चर्चा मंच 1485 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
वाह...बहुत बढ़िया रचना......आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो
धन्यवाद ! Prasanna Badan Chaturvedi जी !

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