*मुक्त-मुक्तक : 457 - और भी ज़्यादा निगाहों..........


और भी ज़्यादा निगाहों में लगो छाने ॥
दिल मचल उठता है तब तो और भी आने ॥
जब भी ये लगता है लगने मुझको शिद्दत से ,
अजनबी हो तुम , पराये तुम , हो बेगाने ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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