*मुक्त-मुक्तक : 454 - बेशक़ दिखने में मैं नाजुक............


बेशक़ दिखने में मैं नाजुक-चिकनी-गोरी-चिट्टी हूँ ॥
लेकिन ये हरगिज़ मत समझो नर्म-भुरभुरी-मिट्टी हूँ ॥
चाहो तो दिन-रात देखलो मुझपे करके बारिश तुम ,
मैं न गलूँगी क़सम तुम्हारी ! अंदर से मैं गिट्टी हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Harsh Tripathi said…
WAH ! KYAA BAAT HAI !!
धन्यवाद ! Harsh Tripathi जी !

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