*मुक्त-मुक्तक : 453 - सितमगर की वो कब................


सितमगर की वो कब आकर के करता है गिरफ़्तारी ?
कहे से और उल्टे उसकी करता है तरफ़दारी ॥
वो थानेदार बस चेहरे से है ईमान का पुतला ,
निभाकर फ़र्ज़ न अपना यों करता है सितमगारी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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