*मुक्त-मुक्तक : 452 - रहूँ प्यासा गुलू में...................


रहूँ प्यासा गुलू में चाहे क़तरा आब न जाये ॥
तुम्हारे इश्क़ में जलने की मेरी ताब न जाये ॥
नहीं क़ाबिल मैं हरगिज़ भी तुम्हारे पर दुआ इतनी ,
तुम्हें पाने का आँखों से कभी भी ख़्वाब न जाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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