*मुक्त-मुक्तक : 448 - आज राजा के जैसा............


आज राजा के जैसा मुझको रंक लगता है ॥
पाँव चींटे का भी मराल-पंख लगता है ॥
इतना हर्षित हूँ काँव-काँव कुहुक लगती है ,
रेंकना गदहों का मंदिर का शंख लगता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (19-01-2014) को "सत्य कहना-सत्य मानना" (चर्चा मंच-1496) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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