*मुक्त-मुक्तक : 445 - क्या फ़ायदा कि चुप हो......................

क्या फ़ायदा कि चुप हो गज भर ज़बान रखकर ?
सुनते नहीं अगर तुम हाथी से कान रखकर ॥
आँखें हैं पर न देखो , सिर धर के गर न सोचो !
फिर तुम तो चलता फिरता मुर्दा हो जान रखकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

sk dubey said…
aaaaaaahaa..........very niccc sir ji

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक