*मुक्त-मुक्तक : 441 - तवील बेशक़ न लेक कुछ तो.......


तवील बेशक़ न लेक कुछ तो ज़रा-ज़रा , कम ही कम सुनाने ॥
किये जो मुझ पर जहाँ ने तारी वो सारे गिन-गिन सितम सुनाने ॥
हर एक दर्दआशना जो सुन-सुन न अश्क़ ढा दे अगर तो कहना ,
बुला कभी मुझको अपनी महफ़िल में मेरी रुदाद-ए-ग़म सुनाने ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे