110 : मुक्त-ग़ज़ल - याद पर याद किये..............



याद पर याद किये जाओ तुम ॥
ख़ुद को बर्बाद किये जाओ तुम ॥
तुमको काँटों से है मोहब्बत गर ,
जाओ बाहों में लिये जाओ तुम ॥
जब वो ख़ुश है वाँ बिछड़ कर तुम से ,
तो यहाँ हँस के जिये जाओ तुम ॥
मय है ग़म की जो दवा तो फ़िर क्या ?
जाम पर जाम पिये जाओ तुम ॥
जीस्त उसकी जो तुम्हारी है क़ज़ा ,
उसपे मरते हो मरे जाओ तुम ॥
कान पर हाथ तो रख लेने दो ,
फ़िर जो बकना है बके जाओ तुम ॥
तुमको छूना अगर है नीलगगन ,
पैर से पंख हुए जाओ तुम ॥
तुमको मरते ही भुला दे न ज़माँ ,
कोई नज़राना दिये जाओ तुम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (08-01-2014) को "दिल का पैगाम " (चर्चा मंच:अंक 1486) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद ! Harsh Tripathi जी !

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