*मुक्त-मुक्तक - ख़िदमत अदब की............






ख़िदमत अदब की हमने दूसरे ही ढंग की ॥
अफ़्साना लिक्खा कोई ना कभी ग़ज़ल कही ॥
बस जब किसी अदीब की शाए हुई किताब ,
लेकर न मुफ़्त बल्कि वो ख़रीदकर पढ़ी ॥
( ख़िदमत=सेवा, अदब=साहित्य, अफ़्साना=उपन्यास,कहानी, अदीब=साहित्यकार, शाए=प्रकाशित )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति





Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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गये साल को है प्रणाम!
है नये साल का अभिनन्दन।।
लाया हूँ स्वागत करने को
थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
है नये साल का अभिनन्दन।।...
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नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपको भी शुभकामनाएँ , मयंक जी !

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