तुझ जैसा नहीं और..............


तुझ जैसा नहीं और किसी देवता का रूप ॥ 
तुझ जैसा नहीं और कोई देवता अनूप ॥ 
देता है ज़रूरत के मुताबिक हरेक को ,
तू गर्मियों में बर्फ ठंड में कड़कती धूप । 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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