*मुक्त-मुक्तक : 399 - ये मनुष्य की करनी है........................

ये मनुष्य की करनी है या भाग्य का लेखा है ?
जो भी हो पर हमने ऐसा घटते पेखा है ॥
वो जो मिनरल-वाटर से ही सौंचा करते थे ,
वक़्त पे उनको मूत गधे का पीते देखा है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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सुन्दर प्रस्तुति।
आज 11-12-13 का सुखद संयोंग है।
सुप्रभात...।
आपका बुधवार मंगलकारी हो।

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