*मुक्त-मुक्तक : 433 - जानवर को बहुत...............



  जानवर को बहुत प्यार करता जहाँ ॥
  पेड़ पौधों पे भी दुनिया देती है जाँ ॥
  दूरियाँ होशियारी से क़ायम रखे ,
  इंसाँ इंसाँ से बचता फिरे याँ वहाँ ॥
              -डॉ. हीरालाल प्रजापति


Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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गये साल को है प्रणाम!
है नये साल का अभिनन्दन।।
लाया हूँ स्वागत करने को
थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
है नये साल का अभिनन्दन।।...
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नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
धन्यवाद ! मयंक जी ! आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।

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