*मुक्त-मुक्तक : 432 - रिश्ता हो कोई ठोंक...................

रिश्ता हो कोई ठोंक बजाकर बनाइये ॥ 

शादी तो लाख बार सोचकर रचाइये ॥ 

अंजाम कितने ही है निगाहों के सामने ,

झूठी क़शिश को इश्क़ो मोहब्बत न जानिये ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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गये साल को है प्रणाम!
है नये साल का अभिनन्दन।।
लाया हूँ स्वागत करने को
थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
है नये साल का अभिनन्दन।।...
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नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपको भी शुभकामनाएँ , मयंक जी !

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