*मुक्त-मुक्तक : 431 - बचपन में ही इश्क ने..............



बचपन में ही इश्क ने उसको यों जकड़ा ॥
है चौदह का मगर तीस से लगे बड़ा ॥
जिससे दोनों हाथ से लोटा तक न उठे ,
वो प्याले सा एक हाथ से उठाता घड़ा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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