*मुक्त-मुक्तक : 429 - तक्लीफ़ो-ग़म-अलम से..................


तक्लीफ़ो-ग़म-अलम से , 
शादमानियों से क्या ?
बेलौस-कामयाबियों , 
बरबादियों से क्या ?
अब जब न तेरा मेरा 
कोई वास्ता रहा -
मुझे तेरी तंदुरुस्ती औ 
बीमारियों से क्या ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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