*मुक्त-मुक्तक : 427 - इतना अमीर था वो.............


इतना अमीर था वो 
ऐसा मालदार था ,
धन का कुबेर उसके आगे 
ख़ाकसार था !
ताउम्र फिर भी क्यों 
कमाई में लगा रहा ,
धेला भी जिसका ख़र्च 
बस कभी कभार था ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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बेशक़, उसके भाग्य में केवल धन संग्रह करना था उसका उपभोग करना नहीं.

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