*मुक्त-मुक्तक : 425 - चाहता हूँ कि मेरे.................


चाहता हूँ कि मेरे दिल में तेरी मूरत हो ॥ 

तू किया करती मेरी रात दिन इबादत हो ॥ 
लैला मजनूँ से हीर राँझे टोला मारू से ,
अपनी दुनिया-ए-इश्क़ में ज़ियादा शोहरत हो ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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