*मुक्त-मुक्तक : 421 - तुझे कब उरूज मेरा...................


तुझे कब उरूज मेरा 
बस जवाल चाहिए था ?
मेरे चेहरे पे हमेशा 
इक मलाल चाहिए था ॥
तेरी रब ने सुनली तेरी 
मर्ज़ी के मुताबिक़ अब ,
मेरा हो गया है जीना 
जो मुहाल चाहिए था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

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