*मुक्त-मुक्तक : 420 - मूरत जो हुस्न की............


मूरत जो हुस्न की कोई पहला बनाएगा ॥ 

वो हू ब हू बस आपका पुतला बनाएगा ॥ 
काढ़ेगा सताइश के क़सीदों पे क़सीदे ,
रंग रुपहला तो रूप सुनहला बनाएगा ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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