*मुक्त-मुक्तक : 416 - बिन कुछ किए धरे भी................


बिन कुछ किए धरे भी वो 
हो जाएँ क़ामयाब ॥
हम लाख उठा-पटक करें 
न कुछ हो दस्तयाब ॥
हम दिल भी जलाएँ तो 
अंधेरा नहीं मिटता ,
वो जुल्फ़ सँवारें तो 
उग जाएँ आफ़्ताब ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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