*मुक्त-मुक्तक : 414 - रफ़्ता-रफ़्ता तेज़ से................


रफ़्ता-रफ़्ता तेज़ से भी 
तेज़ चलती है ॥
गर्मियों में बर्फ़ सी हर 
वक़्त गलती है ॥
शाह हो , दरवेश हो , बीमार या 
चंगा -
सबकी इस फ़ानी जहाँ में 
उम्र ढलती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

VINOD SHILLA said…
बहुत सुंदर

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