*मुक्त-मुक्तक : 412 - न शर्म से न हमने.................


न शर्म से न हमने कभी 
बेझिझक लिया ॥
कल भी नहीं लिया था और न 
आज तक लिया ॥
पुचकारने वाले से 
सीखने की चाह में ,
खाकर हज़ार ठोकरें न 
इक सबक़ लिया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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