*मुक्त-मुक्तक : 411 - सर्द ख़ामोशी से...................


सर्द ख़ामोशी से सुनता 
तो रहा वो रात भर ,
एक भी आँसू न टपका 
आँख से उसकी मगर !
क्या मेरी रूदादे-ग़म में 
मिर्च की धूनी नहीं ?
दास्ताने-इश्क़ मेरी 
आँख को है बेअसर ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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