*मुक्त-मुक्तक : 410 - जो कुछ हुआ है तुझको..................


जो कुछ हुआ है तुझको 
सब किस तरह बताऊँ ?
मैं अपने हारने की 
तुझे क्या वजह बताऊँ ?
जब गुल सहेजने का 
भी माद्दा रहा ना ,
फ़िर ख़ार को कहाँ की 
रखने जगह बताऊँ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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