*मुक्त-मुक्तक : 409 - जब मुझको ज़रूरत थी................


जब मुझको ज़रूरत थी तेरी 
दैया रे दैया  !
उस वक़्त तो कुछ और ही था 
तेरा रवैया ॥
अब चाहिए तुझको मेरी 
इमदादो-मदद तो ,
तू हो रहा है शेर से इक 
पालतू गैया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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