*मुक्त-मुक्तक : 408 - उनसे फ़िर क्यों................


उनसे फ़िर क्यों 
गुफ़्तगू होने लगी ?
हर कहीं और 
हर कभू होने लगी ॥
फ़िर से दिल खिंचने 
लगा उनकी तरफ़ ,
दुनिया फ़िर 
मेरी अदू होने लगी ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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