*मुक्त-मुक्तक : 407 - नींद का चोर...........................


नींद का चोर आज 
रात ख़ुद नहीं सोया ॥
दर्द दे खिलखिलाने 
वाला सुबक कर रोया ॥
क्या हुआ ? क्यों हुआ ? 
ये बात तो वही जाने ,
बस सुकूँ ये कि लुटेरे का 
भी कुछ तो खोया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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