*मुक्त-मुक्तक : 405 - उसको कितना करूँ मैं...................


उसको कितना करूँ मैं याद ?
बजा आता था ॥
ख़्वाब उसका हो कोई ख़ूब 
सजा आता था ॥
उसका मिलना तो मुझको ख़ैर 
ग़ैर मुमकिन था ,
उसको पाने की काविशों में 
मज़ा आता था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (20-12-13) को "पहाड़ों का मौसम" (चर्चा मंच:अंक-1467) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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