*मुक्त-मुक्तक : 404 - तुम ही नहीं अकेले.......................


तुम ही नहीं अकेले याँ 
तमाम रहे हैं ॥
कई नामी-गिरामी कई 
गुमनाम रहे हैं ॥
बेरोज़गार तुम हो , हो 
बेकार यहाँ तो ,
धुर क़ामयाब इश्क़ में 
नाकाम रहे हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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