*मुक्त-मुक्तक : 401 - होता है तभी खिड़कियों का.................


होता है तभी खिड़कियों का 
डुलना-खड़कना ;
फ़िर भी न चुप्पियों में ख़लल 
करने फड़कना ,
मजबूरियों में जबकि तुंद 
आँधियाँ  चलें –
बादल में बिजलियों का हो 
पुरशोर कड़कना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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