*मुक्त-मुक्तक : 396 - पूरा था , वो न आधा था.................


पूरा था , वो न आधा था 
न टूक था जनाब ॥
इंसाँ की परख में बड़ा 
अचूक था जनाब ॥
पहली दफ़्आ हुआ कि जाना 
जिसको क़ीमती ,
गिन्नी सरीखा वो किसी का 
थूक था जनाब ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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