*मुक्त-मुक्तक : 395 - जब तक न पास में था.................

जब तक न पास में था 
काम-धाम रोज़गार ॥
बैठे थे धर के हाथ पे हम 
हाथ थे बेकार ॥
सच कह रहे हो तुम 
क़सम ख़ुदा की बेतरह ,
करते थे सुबह-शाम-
रात-दिन हम उनसे प्यार ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 


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